अन्तिम शाम आई है अब लेनी विदाई है।। बीते हर पलों की आज हमको याद आई है, अन्तिम शाम आई है अब लेनी विदाई है।। वो हंसता खेलता आंगन व...
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Friday, August 14, 2020
Monday, August 10, 2020
गंग जीवनदायिनी (Poem)
jaiswalgyan
August 10, 2020
हिमनदी चलती बहकती गिरिवारों के तटों पर, हो गई हर तट की तृप्ति हिमाद्रि से मिलन कर, माटी भी उठ चल पड़ी सुरसरि संग सैर पर, हो गए क...
Saturday, August 8, 2020
कलयुग (Poem)
jaiswalgyan
August 08, 2020
ऐ काल चक्र बस बता दो इतना यह युग कैसा आया है.......।। कांप रही है मातृभूमि मानव से मानव करताया है, ...